Friday, January 09, 2009

वे चाय भी पीते हैं तो बन जाती है खबर

वक्त वक्त की बात है। मुख्यमंत्री बनने के बाद अशोक गहलोत का चाय पीना भी खबर बन जाता है। एक राष्ट्रीय अखबार ने कल उनके दिल्ली में चाय पीने की खबर प्रकाशित की है। खबर महत्वपूर्ण है। मगर सवाल उठाती है कि अगर देश के तमाम नेताओं और बड़ी हस्तियों के चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक पीने पर खबरें छपने लगीं तो अखबारों में बाकी देश के लिए क्या बचेगा?

9 Comments:

At 4:21 PM, Blogger sareetha said...

एक शेर है
हम आह भी भरते हैं ,तो हो जाते हैं बदनाम
वो कत्ल भी करते हैं , तो चर्चा नहीं होता ।
इसे यूं कहें -
वो चाय भी पीते हैं , बन जाती है खबरे आम
हम भूख से मरते हैं , मगर चर्चा नहीं होता ।

 
At 5:02 PM, Blogger Ummed Singh Baid "Saadhak " said...

एकतो यह मीडीया स्वयं इस दुष्ट-तन्त्र का सहयोगी,
दूसरे नेताओं की छपास की भूख.
झेलना है जनता को.
लेकिन सिस्टम की इस प्रिय विधा का
अन्तिम वार सिस्टम को ही शेष करेगा.
सांसें जिन्दा रखती है, या
जीवन यात्रा समाप्त करती है!

 
At 8:39 PM, Blogger प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

वो चाय भी पीते हैं , बन जाती है खबरे आम
हम भूख से मरते हैं , मगर चर्चा नहीं होता ।

 
At 8:58 PM, Blogger Ratan Singh Shekhawat said...

क्या कहें ऐसे अख़बार वालों को जिनके दिमाग का दिवाला निकल चुका हो !

 
At 11:00 PM, Blogger ब्रजेश said...

बाजार ने पत्रकारों को चारण और भाट में बदलकर रख दिया है। अफसोस है। http://chaighar.blogspot.com

 
At 12:02 PM, Blogger संजय बेंगाणी said...

चारण भाटों के जमाने में कौन सा बजारबाद था? हमने प्रतिक बना लिए है, हर समस्या के लिए उसे दोष देकर मनन से मुक्त हो जाते है.

यह खबर, मूर्खता और चमचागीरी की हद है.

 
At 10:59 PM, Blogger डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

वो चाय भी पीते हैं , बन जाती है खबरे आम
हम भूख से मरते हैं , मगर चर्चा नहीं होता ।
hamara bhi kuchh yahi vichar hai.......... ye to kahiye ki CHAY PEENE kii khabar hai........... kahin kal ko subah sham ke nitya kriyakalapon kii khabaren bhi na aane lagen? WAH!!! MEDIA

 
At 7:43 PM, Blogger shelley said...

sareetha ji ki baat se sahmat hu

 
At 3:44 PM, Blogger Sushil Kumar Patial said...

चमचागिरी कि हद है भैय्या
या फिर बिके हुए हैं ले कर रुपया
हे लोकतन्र्त के चौथे स्तंभ
लगता है त्यार हो रही तेरी मृत्यू शैय्या।।

सुशील कुमार पटियाल

 

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