Monday, July 14, 2008

...और अब बारी एक 'सर्वोच्च' साप्ताहिक की

कई अखबारों और चैनलों को अपने आपको नंबर वन और सर्वश्रेष्ठ के रूप में प्रचारित करते हुए देखा है। कभी समझ में नहीं आया कि कोई खुद ही अपने सर्वश्रेष्ठ होने का निर्णय और दावा कैसे कर सकता है? लेकिन लीजिए हाजिर है एक और भी मजेदार दावा। द सन्डे इंडियन पत्रिका ने अपने आपको नया दर्जा दिया है और वह है- देश के 'सर्वोच्च' समाचार साप्ताहिक का। क्या कोई बता सकता है कि सर्वोच्च साप्ताहिक क्या होता है? सर्वोच्च पर्वतमाला, सर्वोच्च पद, सर्वोच्च श्रेणी जैसे प्रयोग तो समझ में आते हैं लेकिन क्या कोई अखबार या पत्रिका भी सर्वोच्च या उच्चतम हो सकती है? यदि ऐसा है तो फिर कुछ निम्नतम, कुछ औसत, कुछ मध्य-स्तरीय आदि भी पत्र-पत्रिकाएं होंगी? वाकई बहुत नया प्रयोग है और बहुत ऊंचा भी (सिर के ऊपर से जो निकल गया)।

Saturday, July 12, 2008

स्टॉक मार्केट को योगासन करा दिया वेबदुनिया ने

लोकप्रिय हिंदी पोर्टल वेबदुनिया ने अपना कलेवर बदला है। इसके लिए उन्हें बधाई। मगर जरा मुखपृष्ठ पर लगाए गए विभिन्न टैब्स में से एक (योगासन) को क्लिक करके देखिए। वहां तो स्टॉक एक्सचेंज की खबरें हैं!! माना कि इन दिनों स्टॉक मार्केट शीर्षासन की अवस्था में है लेकिन यहां तो सारी की सारी खबरें ही योगासन कर रही हैं!

Friday, July 11, 2008

इसीलिए हो रहा है फरीदाबाद का इतना विकास

टाइम्स ऑफ इंडिया ने फरीदाबाद में चल रहे शानदार विकास का ब्यौरा देते हुए बताया है कि केंद्र सरकार ने उसके विकास के लिए भारी-भरकम रकम खर्च करने की योजना बनाई है। कितनी? यही कोई 2,200 रुपए! अब आप ही अंदाजा लगा लीजिए कि इतनी बड़ी रकम होगी तो भला फरीदाबाद तरक्की की दौड़ में किसी से पीछे कैसे रहेगा?

Thursday, July 10, 2008

राजनैतिक संकट में कबूतरों की क्या भूमिका है?

नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर आज उमा भारती के गुवाहाटी दौरे का चित्र छपा है जिसमें उन्हें कबूतरों को चुग्गा डालते दिखाया गया है। चित्र तो सामान्य सा है मगर कैप्शन का जवाब नहीं। लिखा है- देश में राजनैतिक तूफान आया हुआ है और उमा भारती गुवाहाटी में कबूतरों को दाना डाल रही हैं।

क्यों भाई, राजनैतिक संकट के दिनों में कबूतरों को दाना डालना गुनाह है क्या? बेचारे कबूतरों ने पत्रकारों या नेताओं का क्या बिगाड़ा है जो उनका दाना-पानी बंद करने की बात की जा रही है? कैप्शन में यह भी लिख दिया जाता कि राजनैतिक तूफान के दिनों में और क्या-क्या नहीं किया जाना चाहिए तो और मार्गदर्शन हो जाता।

Monday, July 07, 2008

डॉ. मनमोहन सिंह बनाम ऐय्याश प्रेमी?

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली आदि से प्रकाशित देशबंधु में सात जुलाई को एक मजेदार खबर छपी। खबर ऐय्याशी करने वाले एक प्रेमी की गिरफ्तारी के बारे में है जिसमें प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का फोटो लगा दिया गया है। मनमोहन सिंह जी तो बेचारे न ऐय्याशी करते हैं और न ही प्रेमी हैं। वैसे खबरों में गलत फोटो लगाए जाने के मामले में मनमोहन सिंह जी काफी लोकप्रिय दिखाई देते हैं। पहले भी हम ऐसी खबरों के बारे में खबर दे चुके हैं जिनमें बिना वजह डॉ. सिंह का चित्र लगा दिया गया। मिसाल के तौर पर याहू और माइक्रोसॉफ्ट के सौदे के बारे में आई एक खबर में भी मनमोहन सिंह जी का चित्र लगा था। खबर यहां देखिए-

यह सूचना सुधी पाठक बलबिंदर सिंह पाबला ने भेजी है।

Wednesday, June 25, 2008

ये कौनसे इंटरनेट के डोमेन नेम हैं भैया

इंटरनेट पर नए डोमेन एक्सटेंशन (.com, .net आदि) शुरू किए जाने की संभावनाओं पर नवभारत टाइम्स में छपी खबर बड़ी मजेदार है। अखबार ने बड़ी मजेदार सूचना दी है कि ब्रिटेन का डोमेन एक्सटेंशन '.ह्द्म' है और इटली का '.द्वह्ल'। इसी तरह कामर्स का डोमेन एक्सटेंशन '.ष्श्रद्व' है और इन्स्टीट्यूशनल ऑर्गनाइजेशनों के लिए 'ठ्ठद्रह्ल' और '.श्रहद्द' डोमेन एक्सटेंशन इस्तेमाल होते हैं। अखबार लिखता है कि दुनिया में .333 नामक डोमेन एक्सटेंशन को लेकर बहुत मांग और विवाद है। अखबार ने जो डोमेन एक्सटेंशन लिखे हैं उन्हें तो टाइप करना भी बड़ी टेढ़ी खीर है। खैर मैं उन्हें इससे ज्यादा शुद्धता के साथ टाइप करने में असमर्थ हूं। ये सभी एक्सटेंशन असल में .xxx, .uk, .it, .com, .edu और .org लिखे जाने चाहिए थे। गलती अंग्रेजी टेक्स्ट को हिंदी में कनवर्ट कर दिए जाने से हुई लगती है, लेकिन है मजेदार और 'ज्ञानवर्धक'। आप भी पढ़ें-

Monday, June 16, 2008

क्या भारत में एक ही शादी-वेबसाइट है?

ताज्जुब की बात है, याहू पर छपे एक लिंक के मुताबिक भारत में वैवाहिक गठबंधन करवाने वाली सिर्फ एक ही साइट है, और वह है -सिम्प्लीमैरी.कॉम। जहां तक मेरी जानकारी है, इस सारे खेल की शुरूआत ही शादी.कॉम ने की। उसके बाद भारतमैट्रीमनी.कॉम और जीवनसाथी.कॉम ने अच्छी-खासी सफलता हासिल की। वैसे भी शादियां कराने के खेल में सिम्प्लीमैरी.कॉम तो बहुत पीछे है। फिर यह भारत की एकमात्र मैट्रीमनी साइट कैसे हो गई? उपरोक्त ही क्यों, आजकल तो शादियां करवाने वाली वेबसाइटों की भीड़ लगी है। मिसाल के तौर पर- सैकंडशादी.कॉम, इंडियनरिश्ते.कॉम, हमारीशादी.कॉम, लाइफपार्टनरइंडिया.कॉम और न जाने क्या क्या..

क्या याहू भी कैलेंडरों और दीवारों पर इश्तिहार लिखने वाले छुटभैये दुकानदारों की तर्ज पर एकमात्र शब्द का प्रयोग करने लगा है? जैसे कि कुछ लोग लिखा करते हैं- दिल्ली में बंगाली मिठाइयों की एकमात्र दुकान, या फिर जयपुर में स्टेशनरी मिलने का एकमात्र स्थान। इतना बड़ा पोर्टल भला ऐसा कैसे लिख सकता है?

Friday, June 13, 2008

एक हवा-हवाई हैडलाइन

हिंदी इकॉनॉमिक टाइम्स में आज संपादकीय पेज पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू विमानन कंपनियों के बीच चल रही होड़ के बारे में एक लेख छपा है। शीर्षक दिया गया है- हवाई विमान और जमीन पर घमासान। हवाई विमान? अगर विमान लिखा है तो क्या हवाई लिखने की भी जरूरत है? कहीं ऐसा तो नहीं कि नई तकनीक के दौर में विमान जमीन और समुद्र में भी चलने लगे हों इसलिए हवा में उड़ने वाले विमानों के लिए खास तौर पर हवाई शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य है ताकि लोग कहीं उन्हें पानी में चलने वाले विमान न समझ लें।


पुनश्चः वैसे लगता यह है कि हैडलाइन देने वाले बंधु ने दोनों लाइनों के बीच कवितात्मक तुक भिड़ाने के लिए हवाई शब्द जोड़ा होगा- हवाई विमान और जमीन पर घमासान। मगर कवितात्मक शीर्षक देने की ऐसी भी कौनसी मजबूरी है कि विमान को विशेष प्रयास करके हवा-हवाई बनाना पड़े?

Tuesday, June 10, 2008

पूरे देश में हजार कंप्यूटर बिकें तो क्या बड़ी खुशी की बात है?

आईडीसी की तरफ से भारतीय कंप्यूटर बाजार पर जारी की गई रिपोर्ट की खबर देने में टाइम्स ऑफ इंडिया चूक गया। नौ जून को छपी टाइम्स की खबर के अनुसार पूरे भारत में तीन महीनों में एक हजार कंप्यूटर बिके हैं और वह इस उपलब्धि को लेकर बहुत खुश है। उसका कहना है कि कंप्यूटर बाजार में पूरे दस फीसदी की बढ़ोत्तरी होने से यह आंकड़ा हासिल किया जा सका है। यानी पिछली तिमाही में तो पूरे देश में करीब नौ सौ कंप्यूटर बिके होंगे। इस हिसाब से देखें तो पूरे साल में भारत में तीन हजार से कुछ ज्यादा कंप्यूटर बिकते हैं। वाकई हमने बहुत तरक्की कर ली है। आप भी देखें टाइम्स ऑफ इंडिया की वह रिपोर्टः



वैसे असली खबर यह है कि भारत में इस अवधि में हर घंटे में एक हजार कंप्यूटर बिके। तीन महीने का कैलकुलेशन करेंगे तो टाइम्स ऑफ इंडिया बहुत पीछे छूट जाएगा। ताज्जुब है लिखने वाले सज्जन को नहीं सूझा कि इतने बड़े देश के लिए हजार कंप्यूटर क्या चीज हैं?

Tuesday, May 20, 2008

क्या आपने आज की सबसे महत्वपूर्ण खबर पढ़ी है?

कुछ दिनों पहले एक टीवी चैनल पर सुर्खियों में खबर चलाई गई थी- अमिताभ बच्चन को जुकाम हुआ। लगता था कि इस तरह की महत्वपूर्ण खबरों का कवरेज सिर्फ टीवी चैनलों तक ही सीमित है। लेकिन जोश18 ने इस धारणा का खंडन कर दिया है। उसके पहले पन्ने पर खबर दी गई है- हरमन बवेजा को लू लगी। भई वाह, कितनी अहम खबर है। यह न छपती तो पाठक एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में जानकारी से वंचित रह जाते।

एक और मजेदार बात हुई है। हरमन बवेजा की खबर में फोटो लगाया गया है इंडियन प्रीमियर लीग के एक मैच का। इसे यहां क्यों लगा दिया बंधु? क्या चित्र में मौजूद खिलाड़ियों में हरमन भी शामिल है? या हरमन को आईपीएल की हॉट चीयरलीडर्स को देखने के चक्कर में लू लग गई?

Monday, May 19, 2008

कोई मुझे इस विज्ञापन का अर्थ बताए प्लीज!

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे इस विज्ञापन का अर्थ मेरी समझ में नहीं आया। सोफे के विज्ञापन में चियरलीडर्स का चित्र और साथ में लिखी है यह इबारत कि Everyone deserves a cheerleader. सोफे का चियरलीडर्स से क्या संबंध हो सकता है? क्या दोनों के बीच कोई साम्य है? कुछ ज्यादा ही क्रिएटिविटी नहीं हो गई? जो भी हो, अपने सिर के ऊपर से निकल गई। किसी को पकड़ में आई हो तो कृपया बताए।

Sunday, April 27, 2008

क्या फर्जी वीज़ा भी 'एक्सपायर' होता है?

दिल्ली के मेट्रो नाऊ अखबार में भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने वाले कुछ अफगानियों की उपेक्षा की खबर छपी है। अखबार लिखता है कि ये लोग अफगानिस्तान में हालात बिगड़ने के बाद फर्जी वीज़ा पर भारत आ गए थे और अब वीज़ा की अवधि खत्म हो जाने के कारण परेशान हैं। बात अपनी समझ से परे है। कानूनी तौर पर हासिल किया गया वीज़ा तो एक निश्चित अवधि तक ही मान्य होता है लेकिन क्या फर्जी वीज़ा भी 'एक्सपायर' होता है?

Saturday, April 26, 2008

नवभारत टाइम्स सही या इकॉनामिक टाइम्स?

दिल्ली के बीआरटी कॉरीडोर को लेकर कई दिनों से अखबारों में खूब खबरें छप रही हैं। नवभारत टाइम्स और इकॉनामिक टाइम्स ने भी इस बारे में एक ही दिन खबर छापी लेकिन दोनों अलग-अलग बात कहती है। नभाटा का कहना है कि बीआरटी कॉरीडोर का परीक्षण बुरी तरह नाकाम रहा जबकि इकॉनामिक टाइम्स का कहना है कि उसका परीक्षण सफल रहा। दोनों एक ही दिन के अखबार, दोनों एक ही समूह के अखबार, दोनों एक ही भाषा के अखबार। उस पर तुर्रा यह कि नवभारत टाइम्स खरीदने वालों को इकॉनामिक टाइम्स (हिंदी) मुफ्त दिया जा रहा है। अब पाठक किसकी बात सही माने?

Friday, April 25, 2008

बेचारा सरबजीत! एक तरफ फांसी, दूसरी तरफ सजा-ए-मौत

समाचार एजेंसी भाषा ने महत्वपूर्ण खबर दी है कि पाकिस्तान सरकार भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की फांसी की सजा को बदल कर सजा-ए-मौत में तब्दील कर सकती है। बेचारा सरबजीत! अब अपनी सजा में होने वाले इस संभावित बदलाव को लेकर वह हँसे या रोए? शायद भाषा वाले ही बता सकते हैं कि इनमें से कौनसी सजा छोटी और कौनसी बड़ी है।


प्रसंगवश, सजा-ए-मौत की जगह आजीवन कारावास या उम्रकैद शब्द का इस्तेमाल किया जाना था।

Wednesday, April 23, 2008

तो वाहन भी हड़ताल पर जाने लगे

एनडीटीवी इंडिया पर कल रात दस बजे के समाचार बुलेटिन में खबर जा रही थी- ऑटोरिक्शा की हड़ताल खत्म। ताज्जुब है, ऑटोरिक्शा भी हड़ताल पर चले जाते हैं! हम समझते थे ऑटोरिक्शा चालक जाते होंगे, लेकिन जमाना नया है, रफ्तार नई है, तकनीक नई है... क्या पता ऑटोरिक्शा भी अपने हितों को लेकर जागरूक हो गए हों। आप भी देखें।

Saturday, April 19, 2008

जिस मैच में सचिन न खेलें वह उनका मैच कैसे हुआ?

याहू (वीडियोज) ने एएनआई की दी हुई खबर जिस तरह छापी है वह अपनी समझ से बाहर है। याहू लिखता है कि सचिन तेंदुलकर शायद अपने पहले आईपीएल मैच में नहीं खेलेंगे। अब जिस मैच में वे खेलेंगे ही नहीं, उसे उनका पहला मैच कैसे कहा जा सकता है? और अगर वे अपने पहले मैच में नहीं खेलेंगे तो क्या आईपीएल मैचों में अपने कॅरियर की शुरूआत सीधे अपने दूसरे मैच से करेंगे? लिखना शायद यह था कि संभवतः सचिन मुंबई इंडियन्स टीम के पहले मैच में नहीं खेल सकें। उनके अपने पहले मैच में तो उनका खेलना तय है, भले वह आज हो या फिर कभी। (वैसे यह खबर इसी हैडलाइन के साथ कई जगह छप गई है, एजेंसी की जो है)।

Thursday, April 17, 2008

चंद्रशेखर 'आज़ाद ' से मिलने गई थीं सोनिया गांधी?

अभी अभी प्रभासाक्षी में एक गर्मागर्म गलती हुई है। हालांकि मुश्किल से पांच मिनट ऑनलाइन रही और पेज इंचार्ज साथी ने झटपट सुधार ली। मगर थी बड़ी मजेदार गलती। प्रभासाक्षी में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के बारे में एक लेख जा रहा है। भाई लोगों ने गलती से चित्र अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का लगा दिया। लेख में जा रहा है कि जब स्व. चंद्रशेखर बीमार थे तो प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे मिलने गए थे। आप भी देखिए-



और अब सुधार कर इस तरह कर दिया गया है-

Wednesday, April 16, 2008

कंपनी को मिले पूरे 221 रुपए के दो ऑर्डर

हिंदुस्तान टाइम्स ने खबर दी है कि यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स नामक कंपनी को दो बड़े भारी ऑर्डर मिले हैं- पूरे 221 रुपए के। वाकई ऑर्डर बहुत बड़े हैं तभी तो हिंदुस्तान टाइम्स ने बाकायदा अपने बिजनेस पेज पर इस खबर को कवर किया है। लगता है इतने बड़े-बड़े ऑर्डर मिलने के कारण ही आजकल इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियलटी क्षेत्र का खस्ता हाल है।

Tuesday, April 15, 2008

ये कौनसी ट्रेन चला रहे हैं भारत-बांग्लादेश के बीच

हिंदी पोर्टल जोश-18 ने भारत और बांग्लादेश के बीच मैत्री एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू होने के बारे में खबर दी है और न जाने कहां से बड़ी खूबसूरत, पश्चिमी किस्म की ट्रेन का चित्र ले आया है। यह वास्तव में किस ट्रेन का चित्र है यह तो जोश वाले ही बता सकते हैं या फिर यूएनआई वाले, जिन्हें चित्र का क्रेडिट दिया गया है।



वैसे असली मैत्री एक्सप्रेस ये है- वही भारी-भरकम हिंदुस्तानी रेलगाड़ी।

Friday, April 11, 2008

क्या साइबर लाइब्रेरी ऐसी होती है?

एक दैनिक अखबार में देश की पहली साइबर लाइब्रेरी के बारे में खबर छपी है जिसमें पचास हजार से ज्यादा ई-बुक्स डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं। लेकिन चित्र लगाया गया है किताबों की लाइब्रेरी का। अब इस तरह की 'साइबर लाइब्रेरी' से अगर डाउनलोड करना हो तो कैसे करेंगे?