Monday, May 19, 2008

कोई मुझे इस विज्ञापन का अर्थ बताए प्लीज!

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे इस विज्ञापन का अर्थ मेरी समझ में नहीं आया। सोफे के विज्ञापन में चियरलीडर्स का चित्र और साथ में लिखी है यह इबारत कि Everyone deserves a cheerleader. सोफे का चियरलीडर्स से क्या संबंध हो सकता है? क्या दोनों के बीच कोई साम्य है? कुछ ज्यादा ही क्रिएटिविटी नहीं हो गई? जो भी हो, अपने सिर के ऊपर से निकल गई। किसी को पकड़ में आई हो तो कृपया बताए।

11 Comments:

At 6:59 PM, Blogger विपुल जैन said...

विज्ञापन की दुनिया में कुछ ऐसा करना कि आपको सोचने पर मज़बूर कर दे कि क्या बकवास है, एक सनसनी फैलाने का तरीका है। मेरी नज़र में चाहे बे मतलब हो, आपका ध्यान तो खींच ही गया.

 
At 7:28 PM, Blogger Shubhashish Pandey said...

vipul ji ne bilkul sahi kaha vigyapan hote he dhayan khichne ke liye hain nakaratmak ho ya sakratmak agar ve aap ka dhayan khichne me safal hain to apne kaam ko pura kar rahe hain
waise ye koi akela vigyapan nahin hoga tamam aise he vigyapan hain
khair ... sahi he hai "dikhave pe na jao apni akal lagao" :-)

 
At 7:42 PM, Blogger DR.ANURAG ARYA said...

nahi shaheb hamari bhi saamjh nahi aaya.....

 
At 8:40 PM, Blogger Udan Tashtari said...

आपका ध्यान चला गया, विज्ञापन सफल हुआ. :) समझ तो हमें नहीं आया.

 
At 9:28 PM, Blogger Suresh Chiplunkar said...

विज्ञापन एजेंसी के मालिक कहना चाहते होंगे कि -
(1) सोफ़े पर बैठते ही आप भी चीयरलीडरानियों की तरह उछलने लगेंगे…
(2) सोफ़ा खरीदते ही आपकी पत्नी/महबूबा चीयरलीडरानी बन जायेगी…
(3) एक सोफ़ा खरीदने पर एक चीयरलीडरानी मुफ़्त… या ऐसा ही कुछ और… तथा मर्यादा भंग न करते हुए कई "नानवेज" आइडिया भी दिमाग में हैं जी… विज्ञापन की दुनिया महान है :) जिसमें अंडरवीयर लेकर बन्दर भागता है अपनी बन्दरिया को रिझाने के लिये… पता नहीं कौन कह गया है कि दुनिया में बेवकूफ़ों की कमी नहीं है, एक ढूंढो हजार मिलते हैं… लेकिन आजकल एक छिछोरा ढूंढो तो हजार मिल जाते हैं, ऐसे ही किसी छिछोरे का दिमाग है इस विज्ञापन के पीछे…

 
At 9:32 PM, Blogger रचना said...

after reading your post i saw their website www.la-z-boy.com because i was under the impression that these reclining chairs are also used as excercise chirs /masaage chairs , but after looking at the website i came to realize that these have no connection with slimming and losing weight . if that would have been so then the advt was making sense because cheerleaders have a fit body . but now it really makes no sense except if they want to convey that "their chairs will give "cheers" or happiness and joy to all those who use it .

 
At 11:36 AM, Blogger संजय बेंगाणी said...

चियर लिडरनी को देख कर कैसे चियर-अप हो जाते है? :) वैसा ही महसुस करेंगे जब आप इस सोफे पर बैठेंगे.... :) चियर्स :)

 
At 5:20 PM, Blogger आशीष कुमार 'अंशु' said...

कही यह ब्लॉग पर विज्ञापन का नया फ़ंड़ा तो नहीं है

 
At 5:21 PM, Blogger आशीष कुमार 'अंशु' said...

कही यह ब्लॉग पर विज्ञापन का नया फ़ंड़ा तो नहीं है

 
At 9:36 PM, Blogger Alok said...

लगता है की विज्ञापन वाले कहना चाहते थे की कुर्सी पर बैठते ही आप को ऐसा आराम मिलेगा, आप अपनी सपनों की मल्लिकाओं (cheerleaders) के साथ खो जाएँगे.

खैर जब अपनी cheerleaders नहीं है तो इसी से काम चला लेते हैं। :D

 
At 7:22 AM, Blogger राजीव तनेजा said...

साफ-साफ तो लिखा है बन्धुवर कि किसी भी तरीके से ..कैसे भी कर के किसी चीयर लीडर को पटाईए और फिर इनकी आरामदायक चेयर पे आराम से ऐश कीजिए :-)

 

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